6.2 रामकथा के रहस्य — शिलाओं पर रामनाम लिखने की कथा कहाँ से आई

6.2 रामकथा के रहस्य — शिलाओं पर रामनाम लिखने की कथा कहाँ से आई

रामकथा पर आधारित फिल्मों और सीरियलों में समुद्र पर सेतु निर्माण के प्रसंग में वानरों को पत्थरों पर ‘राम’ नाम लिखते हुए बताया जाता है,ताकि रामनाम के प्रभाव से पत्थर पानी पर तैरते रह सकें।है तो यह बात राम नाम की महिमा को बढ़ाने वाली,पर यह जानना भी रुचिकर होगा कि यह बात आई कहाँ से?इस सिलसिले में आईए यह जानने का प्रयास करते हैं कि सेतु निर्माण के बारे में किस रामकथा में क्या कहा गया है।

अनेक रामकथाओं में सेतु-निर्माण का उल्लेख नहीं मिलता है।जैन रामकथा विमलसूरीकृत पउमचरियं में समुद्र नामक राजा नल द्वारा पराजित किया जाता है।हेमचन्द्रकृत जैन रामायण में राम-लक्ष्मण सेना सहित आकाश मार्ग से लंका पहुँचते हैं और नल-नील द्वारा समुद्र और सेतु नामक राजाओं को पराजित किया जाता है।गुणभद्रकृत उत्तरपुराण में भी राम और लक्ष्मण विमान से ही जाकर सेना सहित लंका के पास उतरते हैं।

भागवत पुराण में लिखा है कि क्रोधाग्नि के कारण राम की आँखें इतनी लाल थीं कि उनकी दृष्टि मात्र से समुद्र के जीव जलने लगे और भय से काँपते समुद्र ने तुरन्त मार्ग दिया–“यस्मा अदादुदधि….मार्ग सदपि।”

पद्मपुराण के अनुसार राम ने समुद्र के तट पर शिव से सहायता के लिए प्रार्थना की।प्रसन्न होकर शिव ने अजगव धनुष दे दिया।राम ने उस धनुष को समुद्र में डाल दिया और उसी पर सारी सेना ने समुद्र पार किया।

बिर्होर रामकथा में हनुमान् अपनी पूँछ बढ़ाते हैं और राम तथा लक्ष्मण उसी पर से समुद्र पार करते हैं।

किन्तु,वाल्मीकि रामायण में समुद्र पर सेतु निर्माण का बहुत विस्तृत वर्णन किया गया है।समुद्र तट के किनारे राम समुद्र से वर की प्रार्थना कर कुश बिछाकर लेट जाते हैं।उन्होंने इस प्रकार तीन दिन तक समुद्र की आराधना की।किन्तु,समुद्र ने उनकी प्रार्थना पर कोई ध्यान नहीं दिया।तब राम क्रोधित हो गए और उन्होंने लक्ष्मण से कहा कि यह जड़बुद्धि समुद्र ऐसे नहीं मानेगा।मैं अपने बाण से इसे सुखा डालूँगा,तब समस्त सेना इसे ऐसे ही पार कर लेगी।यह कहकर उन्होंने लक्ष्मण से धनुष-बाण मंगवाया और एक बाण ब्रह्मास्त्र के मंत्र से अभिमंत्रित कर अपने धनुष पर चढ़ाकर जोर से खींचा।तब समुद्र में जोरदार खलबली मची और समुद्र के जीव-जन्तु व्याकुल हो गए।तब समुद्र के जल से स्वयं मूर्तिमान समुद्र ऐसे निकला,जैसे कि मेरु नाम के पर्वत से सूर्य निकलता है।

“ततो मध्यात्समुद्रस्य सागर: स्वयमुत्थित:।

उदयन्हि महाशैलान्मेरोरिवं दिवाकर:।।”

समुद्र गंगा,सिन्धु व अन्य नदियों सहित श्रीराम से समक्ष उपस्थित हुआ और विनम्रतापूर्वक बोला–हे राम,हम तो प्रकृति के अधीन हैं और अपनी मर्यादा में रहते हैं।फिर भी आप कहिए कि मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ।तब श्रीराम बोले कि कोई ऐसा उपाय बताईए कि सेना सागर पार उतर कर लंका पहुँच सके।तब समुद्र बोला कि आपकी सेना में नल नाम का वानर सेनापति है जिसके पिता विश्वकर्मा ने उसे वर दिया है कि तुम मेरे समान हो।इसलिए मेरे जल के उपर नल ही बड़े उत्साहपूर्वक पुल बांधे।यह कह कर समुद्र अन्तर्धान हो गया।

तब वानर श्रेष्ठ महाबली नल ने श्रीराम से कहा! हे महाराज ,समुद् ने जो कुछ कहा है वह सत्य है।मैं मेरे पिता के वरदान के प्रभाव से इस विस्तृत महासागर पर पुल बांधूँगा।

“अब्रवीद्वानर श्रेष्ठो वाक्यं रामं महाबल:।

अहं सेतु करिष्यामि विस्तीर्णे वरुणालये।।

आपके पूछे बिना मैंने अपने मुख से अपने गुणों का वर्णन करना उचित नहीं समझा।मैं निस्संदेह समुद्र पर पुल बांध सकूँगा सो अब इसी समय से वानरश्रेष्ठ पुल बांधने में लग जाएँ।

श्रीराम की अनुमति मिलते ही पर्वताकार वानर यूथपति पर्वत शिखरों और वृक्षों को उखाड़ उखाड़ कर समुद्र तट पर ला ला कर ढ़ेर लगाने लगे।हाथी के समान बड़े-बड़े शरीर वाले महाबलवान वानर पत्थरों को यंत्रों से ढ़ोकर वहाँ पहुँचाने लगे।

प्रथम दिन १४ योजन,दूसरे दिन २० योजन,तीसरे दिन २१ योजन,चौथे दिन २२ योजन और पांचवें दिन २३ योजन कुल सौ योजन लम्बा और दस योजन चौड़ा पुल बांध कर वे सुबेल पर्वत पर पहुँच गए।

नल ने जो सेतु बांधने का दुष्कर काम किया था,कौतुहलवश उसे देखने देव,गंधर्व आने लगे।

“दश योजन विस्तीर्णं शतयोजनमायतम।

ददृशुदेवगन्धर्वा नल सेतु सुदुष्करम्।।

यह सेतु बड़ा मजबूत,सीधा,नीचा-ऊँचा न होकर समान चौरस था और उसमें गढ्ढ़े भी न थे।

“बध्रन्त: सागरे सेतुं जग्मु: पारं महोदधे:।

विशालं: सुकृता श्रीमान्सुभूमि: सुसमाहित:।।

वाल्मीकि रामायण के गौडीय पाठ में दशरथ-सागर की मैत्री का केवल उल्लेख किया गया है।किन्तु,पश्चिमोत्तर पाठ में सागर राम से कहते हैं आपके पिता दशरथ ने मेरे साथ असुरों को हराया था तथा देवताओं से वर पाकर वे मुझे अयोध्या ले गए थे।वहाँ एक माह तक निवास करने के बाद मैं अपने घर चला आया।इससे प्रतीत होता है कि यह समुद्र कोई सागर-तटीय राजा रहा होगा।

पद्मपुराण के अनुसार राम ने अपने बाण से समुद्र को सोख लिया तथा सागर के विनय करने पर वारुणास्त्र द्वारा पुन: उसमें जल भर दिया।भट्टिकाव्य के अनुसार राम-बाण के कारण करोड़ों मछलियाँ मर जाती हैं तथा समुद्र के विनय करने पर राम उन्हें पुन: जिलाते हैं।

महाभारत के रामोपाख्यान के अनुसार राम समुद्र में बाण नहीं चलाते हैं।सागर राम को स्वप्न में दिखाई देता है तथा नल द्वारा फेंके हुए पदार्थ न डूूबने देने की प्रतिज्ञा करता है।स्कंदपुराण के सेतु माहात्म्य में भी ऐसा ही वर्णन है।तत्वसंग्रह रामायण के अनुसार सेतुबंध के पूर्व सागर की पुत्री कन्याकुमारी ने राम के पास आकर विवाह का प्रस्ताव किया था।राम ने युद्ध का बहाना कर उसे अस्वीकार कर दिया तथा सागर पर सेतु बनाने की अनुमति मांगी।

पर प्रश्न अभी भी यह है कि सेतु बनाने वाले पत्थरों पर रामनाम लिखने की बात आई कहाँ से।उपर उल्लेखित वाल्मीकि रामायण सहित किसी भी रामकथा में ऐसी कोई बात नहीं आई।यहाँ तक कि रामचरित मानस में भी ऐसा कोई उल्लेख नहीं है।मानस में समुद्र प्रकट होकर श्रीराम से कहता है कि “नाथ नील-नल कपि द्वौ भाई।लरकाई रिषि आसिष पाई।।तिन्ह के परस किए गिरि भारे।तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे।।

एहि विधि नाथ पयोधि बंधाइअ।

इसमें भी शिलाओं पर रामनाम अँकित करने का कोई उल्लेख नहीं है।

किन्तु,आनन्द रामायण में एक कथा है,जो इस प्रकार है।राम को नल का गर्व भलि-भाँति ज्ञात था।अत: राम के विधान से समुद्र की लहरें नल द्वारा रखे गए पत्थरों को छितराने लगीं।इस पर नल गर्व त्याग कर अपनी कठिनाई राम से निवेदन करने आया और राम ने परामर्श दिया कि पत्थर मेरे नाम के दो अक्षरों से अंकित किए जाएँ।इस प्रकार पत्थरों का जोड़ दृढ़ होने लगा।भावार्थ रामायण का वृतान्त भी इससे मिलता-जुलता है।नल के गर्व के कारण पत्थर डूबने लगे।हनुमान् ने कहा कि इसका कारण नल का गर्व ही है।वह राम के चरणों से पत्थरों का स्पर्श कराना चाहते थे।किन्तु उन्हें डर लगा कि कहीं वे पत्थर अहल्या के समान सुन्दरियाँ न बन जाएँ।अत: हनुमान् राम के राज्य से पत्थर लाए और वानरों ने अपने नखों से उन पर राम नाम अंकित कर दिया।राम नाम के प्रभाव से पत्थर नहीं डूब सके।यही वह कथा है,जिसके कारण फिल्मों और सीरियल्स में सेतु-निर्माण के प्रसंग में पत्थरों पर राम नाम अंकित करते हुए बताया जाता है।

No photo description available.
Back To Top