सदैव शांत रहने वाले और जगत-पिता श्रीराम सहसा कुपित होकर त्रिलोकी को तहस-नहस करने पर उतारू हो सकते हैं,इस बात पर विश्वास करना कठिन है। किन्तु, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हमेशा शांत और संयत रहने वाला व्यक्ति जब क्रोधित हो जाता है तब उसका क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। रामचरितमानस में […]
4.1 कितनी सच है शबरी की कथा
शबरी की कथा को रोचक और भावपूर्ण बनाने के लिए प्रवचनकार अपनी-अपनी मति के अनुसार इसे अनेक रंग-रूप देकर सुनाते हैं।अधिकतर अपनी कथा में इस बात को अवश्य शामिल करते हैं कि कैसे उसने श्रीराम को अपने झूठे बेर खिलाए और प्रभु ने भी उन्हें बार-बार सराह कर खाते रहे।शबरी की कथा में झूठे बेर […]
4.2 वालि-वध की विविध रामकथाएँ
परम् प्रतापी श्रीराम ने वालि का वध का छुप कर किया था,ये बात कुछ अटपटी सी लगती है।जिन राम के बारे में “भृकुटि विलास सृष्टि लय होई” कहा जाता है,भला वो ऐसा क्यों करेंगे।इसलिए अनेक राम कथाएँ ऐसी भी हैं,जो यह कहती हैं कि राम ने छुप कर नहीं,अपितु द्वंद- युद्ध में वालि की वध […]
4.3 रावण का अहंकार और सीता का धर्मबल
रावण सीता जी का अपहरण कर उन्हें लंका ले तो आया,फिर सोचने लगा कि अब ऐसा क्या किया जाए,जिससे जानकी मुझ पर प्रसन्न हो सके।उसने तब अपने अन्त:पुर में सीता जी को ले जाकर बैठा दिया और राक्षसियों को आज्ञा दी कि मेरी आज्ञा के बिना कोई भी सीता से मिलने न पाए।उसने यह भी […]
5.1 क्या राम ने शिव के साथ शक्ति की उपासना की थी
आद्यशक्ति जगदम्बिका की कृपा के बिना दुनिया के कोई भी कार्य संभव ही नहीं है।समस्त शक्ति की स्त्रोत वे ही हैं।रावण से युद्ध के पूर्व श्रीराम ने भी नवरात्रि का व्रत कर माता जगदम्बिका की आराधना की थी और उनका आशीर्वाद पाया था।शिव के साथ शक्ति की उपासना करना स्वाभाविक बात प्रतीत है।क्योंकि दोनों ही […]
5.2 कैसी थी श्रीराम की कद-काठी
रामचरित मानस की कथा तो हम जानते ही हैं कि जब हनुमान् जी माता सीता से भेंट करने लंका गए तो उन्होंने अपना आकार सूक्ष्म बना लिया और वे अशोक के वृक्ष पर चढ़ कर स्वयं को पत्तों में छिपा कर बैठ गए। वहाँ कुछ देर बाद अंत:पुर की स्त्रियों के साथ रावण आया।उसने सीता […]
5.3 शत्रु की भी सराहना करने वाले महान पराक्रमी हनुमान्
आमतौर पर हम तो अपने मित्रों के गुणों की सराहना करने में कंजूसी वापरते हैं। जबकि,जो गुणग्राहक होते हैं, वे इस मामले में बहुत उदार होते हैं और मित्रों या परिचितों के छोटे-छोटे गुणों की सराहना करने से भी नहीं चूकते। पर जो महान होते हैं, उनकी गुणग्राहकता और भी अधिक होती है और वे […]
6.1 शिव प्रतिष्ठा सेतु की कथा कितनी सच्ची
श्रीराम ने शिव-प्रतिष्ठा सेतु निर्माण के समय की थी या रावण वध के बाद लौटते समय? इस बारे में ग्रंथों में मत-भिन्नता है।वाल्मिकी रामायण में सेतु-निर्माण के समय शंभु स्थापना का उल्लेख नहीं है। किंतु, रावण विजय के बाद राम लौटते हैं,तब सीता जी को सेतु दिखला कर कहते हैं कि महादेव ने यहाँ मुझ […]
6.2 रामकथा के रहस्य — शिलाओं पर रामनाम लिखने की कथा कहाँ से आई
रामकथा पर आधारित फिल्मों और सीरियलों में समुद्र पर सेतु निर्माण के प्रसंग में वानरों को पत्थरों पर ‘राम’ नाम लिखते हुए बताया जाता है,ताकि रामनाम के प्रभाव से पत्थर पानी पर तैरते रह सकें।है तो यह बात राम नाम की महिमा को बढ़ाने वाली,पर यह जानना भी रुचिकर होगा कि यह बात आई कहाँ […]
6.3 “रावण ने जब शिव से पार्वती जी को मांग लिया”
सुंदर स्त्रियाँ रावण की सबसे बड़ी कमजोरी थी। जहाँ कहीं भी वह ऐसी स्त्री देखता,उसे पाने के लिए आतुर हो जाता। ऐसी स्त्री भले ही उसके आराध्य की भार्या ही क्यों न हो।इस बारे में आनंद रामायण की एक रोचक कथा यूँ है कि एक बार रावण की माता ने उसे आदेश दिया कि वह […]
6.4 राक्षसराज रावण की राज-सभा
राक्षसराज रावण आज कई दिनों के बाद अपने राज-सभा में आकर बैठे हैं।यह एक विशाल सभा-गृह है,जिसके निर्माण में स्वर्ण और मणि-माणिक्य का प्रचुरता से उपयोग किया गया है।इसके दीवालों और स्तंभों पर आकर्षक चित्रांकन किया गया है।राक्षसराज आज किसी गंभीर विषय पर नगर-वासियों से विमर्ष करना चाहते हैं।इसलिए सारे नगर में राजसभा में पहुँचने […]
6.5 (1) “क्या रावण ने यमराज को सचमुच परास्त कर दिया था”
देवर्षि नारद, महाबली रावण के पराक्रम को देखकर बहुत चिंतित थे। क्योंकि, उसका विजय-अभियान निरंतर जारी था। उसने अपने एक अभियान में यक्ष-सेेना को तितर-बितर कर और द्वंद-युद्ध में कुबेर को परास्त कर उनसे पुष्पक विमान छीन लिया था, जो ब्रह्मा जी कुबेर को दिया था। उसने कई प्रतापी राजाओं, जैसे दुष्यंत, सुरथ,पुरूरवा और अनरण्य […]
6.6 (2)”हनुमान् जी की हिमालय यात्राएँ “
आमतौर पर यह माना जाता है कि हनुमान जी एक ही बार हिमालय गए थे,जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी और वे अचेत हो गए थे।तब लंका निवासी वैद्य सुषेण के कहने पर वे संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय पर गए थे। वहाँ बूटी की सही पहचान न कर पाने के कारण पूरा पहाड़ […]
6.7 सीता जी की खोज: जब हनुमान् जी पहुँचे रावण की शयन-शाला में.
किसी के शयन-कक्ष में ताक-झांक करना कोई अच्छी बात तो है नहीं। पता नहीं वहाँ क्या कुछ देखना पड़ जाए। किन्तु, कई बार परिस्थितिवश सज्जन पुरुषों को भी ऐसा करना पड़ जाता है। फिर भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित, संयमी और सदाचारी पुरुष के मन पर वहाँ की स्थिति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। […]
