Author: विजय बुधोलिया

अन्य पौराणिक कथाएँ

8.3 हनुमान् जी: ‘सकल गुणनिधानम्’

आज गाँव-गाँव में हनुमान् जी के संकट मोचक रूप की पूजा होती है, जिसमें वे लक्ष्मण जी के प्राणों पर आए संकट को दूर करने के लिए हिमालय से विशाल औषधि पर्वत आकाशमार्ग से ले जा रहे हैं। लोगों को विश्वास है कि जब वे रामानुज लक्ष्मण की विपत्ति को टाल सकते हैं,तब उनकी विपत्ति […]

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8.4 रामकथा के उत्तरार्द्ध में सीता का प्रसंग

रामकथा को आमतौर पर दुखांत कहानी माना जाता है।महर्षि वाल्मीकि की रामायण भी इस धारणा की पुष्टि करती है।इसमें वर्णित कथा के अनुसार लोकापवाद के कारण अपनी निर्दोष पत्नी को छोड़ देने के बाद राम अश्वमेध के अवसर पर अपने पुत्रों को देखकर सीता को बुला भेजते हैं।वाल्मीकि सीता के साथ सभा में पहुँच कर […]

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8.5 संकट कटै, मिटै सब पीरा

(आज कोरोना के भयपूर्ण वातावरण के बीच मात्र हनुमत-कथा ही वह रामबाण औषधि प्रतीत होती है, जो इस संकट से उबारने में सहायक हो सकती है। संकटमोचक हनुमान् जी के स्मरण मात्र से मन आश्वस्त होता है और ऐसा महसूस होने लगता है कि कोई जागृत शक्ति है, जो हमारे आस-पास ही है और वही […]

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8.6 रामभक्ति के प्रवर्तक पवनपुत्र हनुमान्

चिरंजीवी भक्त शिरोमणियों में दो नामों को सबसे अधिक आदर के साथ लिया जाता है।एक हैं श्रीहरि विष्णु के अनन्य भक्त देवर्षि नारद और दूसरे हैं श्रीहरि के ही पूर्णावतार राम के परम् भक्त पवनपुत्र हनुमान्।अपनी भक्ति में हनुमान् देवर्षि नारद से बीस ही पड़ते हैं।।देवर्षि नारद ने तो एक बार नारी-मोह में पड़ कर […]

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8.7 किनके पुत्र थे हनुमान्

प्रभु राम ने जिस भी कल्प में जिस भी कारण से जन्म लिया हो,हर जन्म में उनके माता-पिता कौशल्या और दशरथ ही रहे। किन्तु,उनके परम् भक्त और अनन्य सेवक हनुमान् किनके पुत्र थे,यह कुछ निश्चित नहीं है और इस सम्बंध में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने भी ‘हनुमान् चालीसा’ में उन्हें अंजनि-पुत्र,पवनसुत, शंकर […]

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8.8 हनुमान् जी की गदा

आजकल के सियासी माहौल में जो भी धार्मिक प्रतीक हाथ लग जाता है,राजनीति उसका दोहन करने में पीछे नहीं रहती। अब लोगों का ध्यान हनुमान् जी की गदा पर गया है, इसलिए जगह-जगह उसका प्रदर्शन होने लगा है। हनुमान् जी के साथ उनकी गदा अनिवार्यत: बताई जाती है। कुछ उनकी गदा का नाम कौमुदकी बतलाते […]

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8.9 रामभक्ति के आचार्य हनुमान्

श्रीराम से निष्प्रयोजन और निष्काम प्रेम करने वालों की यदि सूची बनाई जाए, तो नि:संदेह उसमें हनुमान् जी का नाम सबसे पहले आएगा। यूँ तो माता सीता,भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न का राम के प्रति प्रेम और समर्पण कुछ कम नहीं था।परन्तु, उनका राम से केवल भक्ति का ही नहीं अपितु कुछ और नाता भी था। यहाँ […]

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8.10 लोक-देवता हनुमान्

हनुमान जी हमारे लोक जीवन में रचे-बसे ऐसे देवता हैं कि वे सभी को अपने से लगते हैं।किसी भी तरह के संकट आने पर सबसे पहले हम हनुमानजी को ही याद करते हैं।वे ही एक ऐसे देवता हैं जिनके बारे में भरोसे से कहा जा सकता है ‘सबहिं सुलभ,सब दिन,सब देसा।सेवत सादर समन कलेसा।।वे हैं […]

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8.11 कहाँ था मंदोदरी का मायका

रावण की पटरानी मंदोदरी कहाँ की थी,इसे लेकर इतिहासकार- पुराणकार और अध्येता देश के कई नगरों की चर्चा करते हैं।मध्यप्रदेश के मंदसौर और राजस्थान के मंडोर के लोग दशाशन को अपना दामाद बताते हैं।कुछ समुदाय रावण से ऐसे ही रिश्तों को मानकर विजयादशमी पर देश के अन्य हिस्सों की तरह उनका पुतला नहीं जलाते। लेकिन […]

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8.12 भगवान शिव के आराध्य श्रीराम

हमारे यहाँ अगर आध्यात्म की बात छेड़ दी जाए तो साधु-संतों की तो छोड़िए,आम आदमी भी उपदेश के मूड़ में आ जाता है। वह भी संसार को असार,मिथ्या और माया बतलाने लगता है।गृहस्थी उसे बोझ और सन्यास उसे मोक्ष का मार्ग लगने लगता है।उसे ऐसा लगना स्वाभाविक भी है।हमारे साधु-संतों, उपदेशकों, प्रवचनकारों से उसे सदा […]

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8.13 जब भवानी ने छोड़ दिया,भोलेनाथ का साथ

ऐसा कौन सा परिवार होगा, जहाँ पति-पत्नी के बीच चुहुलबाजी, नोंक-झौंक या कहा सुनी न होती हो। पर अच्छे और सुलझे गृहस्थ घर की बात को घर में ही निपटा-सुलझा लेते हैं। किन्तु, यह बात भोलेनाथ की है, जो नहीं जानते थे कि घर-परिवार में शाँति बनाए रखने के लिए क्या-क्या करना चाहिए। जैसे हर […]

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8.14 भगवान गणेश कैसे बने गजानन

आदिदेव भगवान गणेश यूँ तो समयचक्र से परे और सर्वदा-सर्वत्र विद्यमान रहने वाले देव हैं, यही कारण था कि भोलनाथ और माँ जगदम्बा के विवाह में भी उन्हें पूजा गया था। ऐसा कैसे हुआ? इस शंका के निवारण के लिए गोस्वामी जी ने मानस में लिखा– “मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि। कोई सुनि संसय […]

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8.15 “क्या रामायण के पात्रों का सामना ऐतिहासिक जातियों से हुआ था?”

यह बात तो उलटबांसी सी ही लगती है।भला यह कैसे संभव है कि रामायणकालीन पात्रों का सामना इतिहास कालीन विदेशी जातियों से हुआ हो। यहाँ इतिहासकालीन का अर्थ मात्र यह है कि इतिहास में जिनकी तिथि और कालक्रम सुनिश्चित किया जा चुका हो। क्योंकि, रामायण कालीन पात्रों की पुरातनता तय करना तो बहुत कठिन है। […]

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8.16 महाभारत में रामकथा

रामायण की घटनाएँ महाभारत से बहुत पहले घटित हुईं थीं । इसलिए सहज ही यह माना जा सकता है कि रामायण की रचना महाभारत से पहले ही हुई होगी। वैसे भी रामायण में महाभारत के किसी पात्र का उल्लेख नहीं है, जबकि, महाभारत में चार स्थलों पर रामकथा का वर्णन किया गया है। फिर भी […]

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