राजा भोज का जिक्र आते ही हमारे मन में धार के परमार वंशीय राजा भोज की छवि उभरती है, जिन्होंने वर्ष 1000 से 1055 तक राज्य किया था।निश्चित ही वे बहुत बड़े विद्वान,अच्छे कवि, दार्शनिक और ज्योतिषशास्त्री थे।कहा जाता है कि उन्होंने धर्म,खगोल विद्या,कला,कोष रचना,भवन निर्माण,काव्य, औषध शास्त्र आदि विषयों पर ग्रंथ लिखे।वे बहुत बड़े […]
यादों केे झरोखों से:: … ” तूफान में फँसी जिंदगी–भय और आशंका के वो बाईस घंटे”
देश के दिल में बैठे हम मध्यप्रदेश के लोग कुदरत के बहुत से कहर से बचे हुए हैं, जिनमें एक समुद्री तूफान भी है। हाँ, कभी-कभार तेज हवाएँ चलती जरूर हैं, पर वह तूफानी हवाओं केे पासंग में भी नहीं बैठतीं। इसलिए हमें तूफान की विकटता का कभी अनुभव नहीं होता। किन्तु, कभी-कभी अनचाहे “आ […]
विघ्नहरण की व्यथा
गणेश जी अपने सामने लड्डूओं के थालों को देख-देख कर कंटाल गए थे। जहाँ देखो वहाँ उनके सामने लड्डुओं का थाल लाकर रख दिया जाता है। माना कि मुझे कि लड्डु विशेष प्रिय हैं। फिर भी भला कोई लगातार एक तरह की ही डिश खा सकता है क्या? मेरी इच्छा भी तो होती है कि […]
“वीरांगना दुर्गादेवी–जिन्होंने मुगलों के छक्के छुड़ाए”
आज का दिन उस राष्ट्रनायिका को स्मरण करने का है,जिन्होंने अपनी स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा के लिए युद्ध के मैदान में लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी,पर प्रबल शत्रु के सामने भी अपने हथियार नहीं डाले। जिनके शौर्य,साहस और पराक्रम को देखकर शत्रु सेना के होश उड़ गए थे।उन्हें तो कल्पना ही […]
“संख्या में कम, योगदान में महान: पारसी समाज”
कहते हैं तादाद कम होने से कुछ नहीं घटता,अगर आप में ज़ज्बा और हौसला है तो आप बहुत कुछ कर गुजर सकते हैं।यह बात पारसी समुदाय पर पूरी तरह लागू होती है। पारसी समुदाय के लोग जिस भी क्षेत्र में उतरे,वहाँ अपनी मेहनत,प्रतिभा और योग्यता के बल पर अलग पहचान बनाई। चाहे वह क्षेत्र उद्योग […]
