यह बात तो उलटबांसी सी ही लगती है।भला यह कैसे संभव है कि रामायणकालीन पात्रों का सामना इतिहास कालीन विदेशी जातियों से हुआ हो। यहाँ इतिहासकालीन का अर्थ मात्र यह है कि इतिहास में जिनकी तिथि और कालक्रम सुनिश्चित किया जा चुका हो। क्योंकि, रामायण कालीन पात्रों की पुरातनता तय करना तो बहुत कठिन है। […]
8.16 महाभारत में रामकथा
रामायण की घटनाएँ महाभारत से बहुत पहले घटित हुईं थीं । इसलिए सहज ही यह माना जा सकता है कि रामायण की रचना महाभारत से पहले ही हुई होगी। वैसे भी रामायण में महाभारत के किसी पात्र का उल्लेख नहीं है, जबकि, महाभारत में चार स्थलों पर रामकथा का वर्णन किया गया है। फिर भी […]
8.17 जातक कथाओं में राम — बौद्ध-धर्म भी राम से प्रभावित.
भारत में उत्पन्न कोई भी धर्म, राम के उज्जवल चरित्र और उनके आदर्शों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका।इसी कारण जैनियों ने राम चरित्र पर अपने ग्रंथ रचे और बौद्ध धर्म ने भी जातक कथाओं में राम को आदर्श के रूप में अपनाया।इन धर्मों की अपनी मान्यताएँ और स्थापनाएँ रही हैं,जिनमें रामकथा को ढालने […]
8.18 थोड़ी अलग सी है जैन रामकथा
(हम रामकथा से के उस रूप से परिचित हैं, जो ब्राह्मण परम्परा से चली आ रही है,जिसमें राम को श्री हरि विष्णु का पूर्णावतार माना गया है।उनके अवतार लेने का उद्देश्य दुष्टों का विनाश और धर्म की स्थापना रहा है।वाल्मीकि रामायण से रामचरित मानस तक हमें रामकथा का यही स्वरूप दिखता है।किन्तु,हर सम्प्रदाय रामकथा को […]
8.19 कब से शुरू हुई थी रामलीला
रामलीला उत्तरी-भारत में परम्परागत रूप से खेला जाने वाला राम के चरित पर आधारित नाटक है।लोग इन्हें बहुत रुचि से देखते हैं।यह प्राय: विजयादशमी के अवसर पर खेला जाता है।लोकनाट्य के रूप में प्रचलित इस रामलीला का देश के विविध प्रांतों में अलग-अलग तरीकों से मंचन किया जाता है। समुद्र से लेकर हिमालय तक प्रख्यात […]
8.20 अयोध्या में भी थी एक अशोक वाटिका
अशोक वाटिका की बात चलते ही हमें लंका की अशोक वाटिका का स्मरण हो आता है, जो स्वाभाविक ही है। क्योंकि, इस अशोकवाटिका के अतिरिक्त किसी और अशोक वाटिका के बारे में कभी सुना ही नहीं गया। इसी वाटिका में महाबली रावण ने अपहरण के बाद माता सीता को कैद में रखा था, जहाँ उन्हें […]
8.21 कृष्ण से राधा के प्रेम की कल्पना कहाँ से आई
निष्काम,निर्विकार और पवित्र प्रेम को यदि किसी नाम से पहचाना जा सकता है तो वह है ‘राधा-कृष्ण।’माना जाता है कि राधा श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं और दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।भक्तों का मानना है कि ब्रजमंड़ल के कण-कण में राधा-कृष्ण समाए हुए हैं।वास्तविकता तो यह है कि वहाँ राधा नाम की ही प्रधानता […]
8.22 क्या प्राचीन काल में हिन्दुओं में भी तलाक होता था?
हिन्दुओं का आमतौर पर यह मानना है कि ‘तलाक’ की प्रथा भारतीय संस्कृति में कभी नहीं रही। यह प्रथा विदेशी और विधर्मी लोगों के प्रभाव से हमारे यहाँ आ गई है। इसलिए कुछ लोगों का कथन है कि हिन्दी शब्दकोष में तलाक का समानार्थी कोई शब्द नहीं मिलता। पर यह बात पूरी तरह सही नहीं […]
8.23 कृष्ण भक्ति में लीन संत “आण्ड़ाल”
आज भगवान कृष्ण के प्रकटोत्सव के अवसर उन महिला संतों को याद करने की इच्छा हो रही है,जिन्होंने अपना सारा जीवन अपने आराध्य श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया और उनमें ही विलीन हो गईं।एक का नाम तो हमें सहजता से याद आ जाएगा,जिनके कृष्ण प्रेम में पगे पद हम प्राय: सुनते रहते हैं।जी,वे मीराबाई हैं,जो […]
8.24 ‘अपने जन के कारने कृष्ण भए रघुनाथ’
कृष्ण-कथा पर राम-कथा का कितना असर पड़ा,यह तो पता नहीं चलता।किंतु,अर्वाचीन राम-कथाओं पर कृष्ण की रास-लीला संबंधी कथाओं का असर साफ देखा जा सकता है।वैसे प्राचीन ग्रंथों में भी कृष्ण के साथ प्रेम की कथाएँ नहीं मिलती।कृष्ण का प्राचीनतम् उल्लेख पहले छांदोग्य उपनिषद् में और तब महाभारत में मिलता है।इन दोनों ग्रंथों में कृष्ण के […]
8.25 जनकसुता जगजननी जानकी
आज मिथिला में सीता-प्रकटोत्सव की धूमधाम है। वहाँ भी उनका प्रकटोत्सव उतने ही आनंद और आत्मीयता से मनाया जाता है जितना कि अयोध्या में रामजन्मोत्सव। वहाँ के लोग पूरी तरह आश्वस्त हैं कि जनक-नंदिनी मिथिला की बेटी ही थीं और सीतामढ़ी जनपद में ही धरती से प्रकट हुई थीं। इस वर्ष यह तिथी आज 5 […]
