Category: अरण्य कांड

अरण्य कांड

3.1 “पक्षिराज जटायु ने रावण का मुकाबला क्यों किया”

सीता-हरण के बाद श्रीराम के हित में पहली बार अगर किसी प्राणी ने रावण से टक्कर ली थी तो वह था जटायु।पर प्रश्न यह है कि उसने महाबली रावण से मुकाबला क्यों किया?उसका रावण से तो कोई बैर था नहीं?माना कि रावण सीता जी का हरण के ले जा रहा था।किन्तु, उससे जटायु को क्या […]

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3.2 मुसीबत कभी अकेले नहीं आती

कहावत है कि मुसीबत कभी अकेले नहीं आती,जब भी आती है,अपने संगी-साथियों के साथ आती है।पर जो कोई इनका सामना धीरज और साहस से करता है तो उसे इनमें से ही उसे आगे का रास्ता मिल जाता है।श्रीराम के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा था।सीता हरण और जटायु के मरण के बाद वन […]

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3.3 “जब पक्षियों ने तक उड़ाया श्रीराम का उपहास”

सीता जी के अपहरण के बाद राम विरह वेदना से व्याकुल हो जाते हैं। उन्हें नहीं मालूम होता है कि सीता को कौन और कहाँ ले गया है। वे व्याकुलता में वृक्षों,लताओं, पक्षियों,पशुओं से जानकी के बारे में पूछते फिरते हैं कि वे कहाँ हैं अथवा उन्हें कौन और कहाँ ले गया है। उनकी इस […]

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3.4 “श्रीराम से पिंड स्वीकार क्यों नहीं किया दशरथ जी ने”

श्राद्धकर्म के लिए गया का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसी धारणा है कि गया में पिंडदान करने से पितर तृप्त हो जाते हैं । इसलिए इन दिनों देश के कोने-कोने से लोग श्राद्ध करने के लिए गया पहुँचते हैं। हमारी श्रद्धा भले ही गया तीर्थ में हो, पर तुलसीदास जी के मन में गया […]

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3.5 जब श्रीराम जगत के ध्वंस पर उतारू हो गए.

सदैव शांत रहने वाले और जगत-पिता श्रीराम सहसा कुपित होकर त्रिलोकी को तहस-नहस करने पर उतारू हो सकते हैं,इस बात पर विश्वास करना कठिन है। किन्तु, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हमेशा शांत और संयत रहने वाला व्यक्ति जब क्रोधित हो जाता है तब उसका क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। रामचरितमानस में […]

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