श्रीराम लंका से कब और कैसे लौटे थे,इस बारे में अलग-अलग कथाएँ हैं।वाल्मीकि रामायण की प्रचलित कथा के अनुसार राम विभीषण का आतिथ्य-सत्कार अस्वीकार कर उनसे अयोध्या की यात्रा का प्रबंध करने का अनुरोध करते हैं।विभीषण पुष्पक प्रस्तुत करता है।राम की अनुमति पाने पर सुग्रीव अपने वानरों और विभीषण अपने आमात्यों के साथ पुष्पक पर […]
7.2 श्रीराम के विविध काम.
रामकथा के कई आयाम हैं।पर रामचरित मानस की रामकथा के अनुसार श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे,उनका राज्याभिषेक हुआ,राम राज्य आ जाने से हर ओर आनंद-मंगल का वातावरण छा गया।सब सुखी और निरोगी हो गए और अपने कर्तव्य पालन में लग गए।तुलसीदास जी ने इसका वर्णन कुछ इस तरह किया है:- “दैहिक दैविक भौतिक […]
7.3 “श्रीराम को कहाँ आराम”
रामकथा के कई आयाम हैं।पर,रामचरित मानस की रामकथा के अनुसार श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे,उनका राज्याभिषेक हुआ,राम राज्य आ जाने से हर ओर आनंद-मंगल का वातावरण छा गया।सब सुखी और निरोगी हो गए और अपने कर्तव्य पालन में लग गए।तुलसीदास जी ने इसका वर्णन कुछ इस तरह किया है:- “दैहिक दैविक भौतिक तापा। […]
7.4 लवणासुर के संहारक- शत्रुघ्न.
श्रीहरि विष्णु के अंशावतार और श्रीराम के अनुज होने के उपरान्त भी रामकथाओं में शत्रुघ्न का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। यद्यपि शत्रुघ्न का चरित्र अत्यंत विलक्षण था। वे मौन सेवावृति थे। वे मितभाषी, सत्यवादी और विषय-विरागी थे। वे सदैव भरत के अनुगामी बने रहे। बचपन से ही भरत का अनुगमन और सेवा ही उनका […]
7.5 सीता जी का त्याग
अनेक पौराणिक नायिकाओं का जीवन बहुत कष्ट में बीता।जैसे-दमयंती,सावित्री, अहल्या,सीता आदि।निष्कलंक और निष्पाप सीता जी ने तो कभी सोचा भी नहीं था कि एक बार अग्नि में प्रवेश करने की भीषण परीक्षा से गुजर जाने और अग्निदेव एवं अन्य देवताओं के द्वारा प्रत्यक्ष आकर उनकी पवित्रता का साक्ष्य देने के बाद भी अयोध्या की प्रजा […]
7.6 विष्णुभक्त नारद जी का मोह
पुराणों में शायद ही कोई ऐसी कथा होगी,जिसमें नारद जी का उल्लेख न हो।ब्रह्माजी के मानस पुत्र देवर्षि नारद अद्भुत व्यक्ति थे।वे त्रिकालदर्शी, वेदों के ज्ञाता,समस्त शास्त्रों के मर्मज्ञ, परम तेजस्वी और सभी विद्याओं में निपुण थे।देव-दानव सभी उनका सम्मान करते थे और सभी लोकों में उनकी गति थी।रामकथा के संदर्भ में तो ऐसा लगता […]
7.7 “श्रीराम ने इस धरा-धाम पर कितना समय बिताया”
श्रीराम ने इस धरा-धाम पर कितना समय बिताया था,यह तो पक्के तौर पर कोई नहीं बता सकता।क्योंकि इस बारे में कई मत हैं।किसी का मानना है कि उन्होंने सौ वर्ष बिताए थे तो किसी का दस हजार वर्ष।पर यह सब मानते हैं कि उन्हें वन में चौदह वर्ष बिताना पड़ा था।वास्तव में राम का वनगमन […]
