सीता जी का विवाह, वस्तुत: कोई स्वयंवर नहीं था। अपितु वह राजा जनक के उस प्रण के अधीन था,जिसमें उन्होंने तय किया था कि जो कोई भी शिव-धनुष को तोड़ सकेगा, उसी को सीता पत्नीस्वरूप दे दी जाएगी। न जाने उन्होंने ऐसा प्रण किसके आश्वासन पर ले लिया था, जबकि उस समय समस्त देवताओं सहित […]
1.16 जब देवताओं ने पहुंचाई राम-विवाह में बाधा
रामकथा के अनेक रूप हैं,एक रूप इस प्रकार भी है।कृतिवास रामायण की कथा के अनुसार राम और सीता के विवाह का जो मुहूर्त वसिष्ठ, वामदेव, जाबालि, कश्यप, मार्कण्डेय और नारद द्वारा आपसी परामर्श कर तय किया था, यदि उस शुभ मुहूर्त में वह सम्पन्न हो जाता तो उनका पूरा वैवाहिक जीवन निर्विघ्न चलता रहता। किन्तु, […]
1.17 तपस्वी,मनस्वी,यशस्वी,थे ऋषि…..!
रावण की त्रैलोक्य विजय -22 @ आर्य और अनार्य, मात्र “दो “शब्द नहीं। दो संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले उत्कृष्ट और निकृष्ट विचार हैं। मन और मष्तिस्क से पवित्र, उत्कृष्ट पक्ष प्रकृति,मनुष्य और जीवन मात्र से प्रेम करता था।और निकृष्ट पक्ष पशुओं को तो छोडिंये ,मनुष्यों तक को मार कर, भूनकर और रांधकर भक्षण कर […]
