श्रीराम ने शिव-प्रतिष्ठा सेतु निर्माण के समय की थी या रावण वध के बाद लौटते समय? इस बारे में ग्रंथों में मत-भिन्नता है।वाल्मिकी रामायण में सेतु-निर्माण के समय शंभु स्थापना का उल्लेख नहीं है। किंतु, रावण विजय के बाद राम लौटते हैं,तब सीता जी को सेतु दिखला कर कहते हैं कि महादेव ने यहाँ मुझ […]
6.2 रामकथा के रहस्य — शिलाओं पर रामनाम लिखने की कथा कहाँ से आई
रामकथा पर आधारित फिल्मों और सीरियलों में समुद्र पर सेतु निर्माण के प्रसंग में वानरों को पत्थरों पर ‘राम’ नाम लिखते हुए बताया जाता है,ताकि रामनाम के प्रभाव से पत्थर पानी पर तैरते रह सकें।है तो यह बात राम नाम की महिमा को बढ़ाने वाली,पर यह जानना भी रुचिकर होगा कि यह बात आई कहाँ […]
6.3 “रावण ने जब शिव से पार्वती जी को मांग लिया”
सुंदर स्त्रियाँ रावण की सबसे बड़ी कमजोरी थी। जहाँ कहीं भी वह ऐसी स्त्री देखता,उसे पाने के लिए आतुर हो जाता। ऐसी स्त्री भले ही उसके आराध्य की भार्या ही क्यों न हो।इस बारे में आनंद रामायण की एक रोचक कथा यूँ है कि एक बार रावण की माता ने उसे आदेश दिया कि वह […]
6.4 राक्षसराज रावण की राज-सभा
राक्षसराज रावण आज कई दिनों के बाद अपने राज-सभा में आकर बैठे हैं।यह एक विशाल सभा-गृह है,जिसके निर्माण में स्वर्ण और मणि-माणिक्य का प्रचुरता से उपयोग किया गया है।इसके दीवालों और स्तंभों पर आकर्षक चित्रांकन किया गया है।राक्षसराज आज किसी गंभीर विषय पर नगर-वासियों से विमर्ष करना चाहते हैं।इसलिए सारे नगर में राजसभा में पहुँचने […]
6.5 (1) “क्या रावण ने यमराज को सचमुच परास्त कर दिया था”
देवर्षि नारद, महाबली रावण के पराक्रम को देखकर बहुत चिंतित थे। क्योंकि, उसका विजय-अभियान निरंतर जारी था। उसने अपने एक अभियान में यक्ष-सेेना को तितर-बितर कर और द्वंद-युद्ध में कुबेर को परास्त कर उनसे पुष्पक विमान छीन लिया था, जो ब्रह्मा जी कुबेर को दिया था। उसने कई प्रतापी राजाओं, जैसे दुष्यंत, सुरथ,पुरूरवा और अनरण्य […]
6.6 (2)”हनुमान् जी की हिमालय यात्राएँ “
आमतौर पर यह माना जाता है कि हनुमान जी एक ही बार हिमालय गए थे,जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी और वे अचेत हो गए थे।तब लंका निवासी वैद्य सुषेण के कहने पर वे संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय पर गए थे। वहाँ बूटी की सही पहचान न कर पाने के कारण पूरा पहाड़ […]
6.7 सीता जी की खोज: जब हनुमान् जी पहुँचे रावण की शयन-शाला में.
किसी के शयन-कक्ष में ताक-झांक करना कोई अच्छी बात तो है नहीं। पता नहीं वहाँ क्या कुछ देखना पड़ जाए। किन्तु, कई बार परिस्थितिवश सज्जन पुरुषों को भी ऐसा करना पड़ जाता है। फिर भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित, संयमी और सदाचारी पुरुष के मन पर वहाँ की स्थिति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। […]
6.8 रावण की चमत्कारी कुलदेवी— ‘निकुम्भला’
इन दिनों नवरात्रि का समय चल रहा है। आज हम एक ऐसी देवी की चर्चा करते हैं,जिनके बारे में आमतौर पर हमें बहुत कम माहिती है। शास्त्रों के अनुसार जब भगवान नारायण ने भगवान नरसिंह का तमस अवतार लिया, तब वे अपने हाथों हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद भी शांत नहीं हुए। देवताओं नरसिंह […]
6.9 ‘जब श्रीराम ने रावण को जीवन-दान दिया’
संभवत: अपवाद स्वरूप ही कोई ऐसा हो,जो अपने शत्रु के बल,तेज, प्रताप और शौर्य की प्रशंसा मुक्त कंठ से कर सकता हो।ढूंढ़ने पर भी ऐसा व्यक्ति मिलना मुश्किल है।केवल श्रीराम में ही ऐसे अनोखे गुण मिल सकते हैं। पराकाष्ठा तो यह है कि एक वही हैं,जो सुधरने का मौका देने के लिए शत्रु को एक […]
6.10 लक्ष्मण का संयम- जो मेघनाथ की मृत्यु का कारण बना.
श्रीराम हम पर भले ही अकारण कृपा कर दें,पर हम बिना मतलब के उन्हें याद नहीं करते।उनके समय में भी ऐसे पात्र कम ही थे,जो नि:स्वार्थ सेवा की भावना से उनसे जुड़े रहे हों।ऐसे पात्रों में एक तो मारुतिनंदन हनुमान का नाम याद आता है,दूसरा सुमित्रानंदन लक्ष्मण का।राम-कथाओं में हनुमानजी काफी बाद में राम के […]
6.11 रावण-वध से संबंधित में कुछ अनोखी कथाएँ.
आज विजयादशमी के दिन को असत्य पर सत्य,बुराई पर अच्छाई,अँधेरे पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाते हैं और मानते हैं कि आज के ही दिन श्रीराम ने दुष्ट रावण का वध किया था।किन्तु,अनेक लोगों का मत कुछ अलग है।।एक ज्योतिषाचार्य श्री योगेश मिश्र ने अपनी ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर बताया कि श्रीराम […]
6.12 कैसे हुआ महाबलशाली रावण का अन्त
महाप्रतापी रावण को मार गिराना श्रीराम के लिए भी आसान नहीं था। रावण महाबली के साथ ही महामायावी भी था। उसने कई विद्याएँ सिद्ध की थीं। जैन रामकथा ‘पमउचरियं’ के अनुसार रावण बहुरूपिणी विद्या की सिद्धि के लिए शांतिनाथ मंदिर में साधना करने जाता है। वह ध्यान में लीन हो जाता है। तब यह ज्ञात […]
