Category: विविध

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मन की मनमानी

‘कोई पास न रहने पर भी जन-मन मौन नहीं रहता,आप आपसे कहता है वह,आप आपकी है सुनता।’ कविवर मैथिलीशरण गुप्त के समय में होता होगा ऐसा,जब मन खुद ही कह-सुन लेता था। पर अब जमाना बदल गया है जी। अब ‘मन’ जब तक अपनी,मतलब ‘मन की बात’ सारी दुनिया को सुना न दे,उसे चैन नहीं […]

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एक घुमक्कड़ संत … ‘सद्गुरु नानकदेव’

“सद्गुरु जग मंह परगटिया मिटी धुंध जग चानन भया।” जगत में जब कोई सद्गुरु अवतार लेते हैं, तब उनके लोकोत्तर प्रभाव से इस संसार की असहिष्णुता, वैमनस्य, दुर्भाव, दुष्प्रवृतियाँ आदि दुर्गुणों की धुंध मिट जाती है और सहिष्णुता, सद्भाव, सद्वृति, बंधुत्व, प्रेम, करुणा आदि दिव्य गुणों का प्रकाश चारों ओर व्याप्त हो जाता है। सद्गुरु […]

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प्राचीन भारत में जुआ

भारत में जुआ खेलने का चलन प्राचीन काल से चला आ रहा है। हम सब जानते हैं कि महाभारत युद्ध की नींव कौरवों की सभा में युधिष्ठिर द्वारा खेले गए जुए से ही पड़ी थी। न वहाँ युधिष्ठिर जुआ खेलते न उस भीषण संहारक युद्ध,जिसे महाभारत कहा जाता है, की नौबत आती। इसी विषय पर […]

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(45 वर्ष पुरानी आप-बीती) … “रिसर्च स्कालर को भीलों ने लूटा” (एक शोध-यात्रा जो त्रासदी में बदल गई)

भानपुरा से लौटा था। हिंगलाजगढ़ जैसी कठिन और खतरनाक जगह,जहाँ जंगली जानवरों और लुटेरे कंजरों से कदम-कदम पर टकराने का डर था, सर्वे बिना बाधा के पूरा हुआ। बाद में यही बात सालती रही कि कोई सनसनीखेज और यादगार घटना नहीं घटी। शोध-कार्य की लगन और जोश ने बीजागढ़ जाने को प्रेरित किया। जो खरगोन […]

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दिनमान में पुरस्कार

एक समय में हिंदी जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक रघुवीर सहाय हुआ करते थे। तब दिनमान ने एक नई ऊँचाई को छुआ था। इस पत्रिका को खरीदना और पढ़ना बुद्धिमान और सुरुचिपूर्ण पाठक होने की निशानी मानी जाती थी। पाठकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए पत्रिका प्राय: नए प्रयोग किया करती थी। इसी […]

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सम्राट मिहिर भोज- जिन्होंने मुस्लिम आततायियों को रौंद दिया था.

राजा भोज का जिक्र आते ही हमारे मन में धार के परमार वंशीय राजा भोज की छवि उभरती है, जिन्होंने वर्ष 1000 से 1055 तक राज्य किया था।निश्चित ही वे बहुत बड़े विद्वान,अच्छे कवि, दार्शनिक और ज्योतिषशास्त्री थे।कहा जाता है कि उन्होंने धर्म,खगोल विद्या,कला,कोष रचना,भवन निर्माण,काव्य, औषध शास्त्र आदि विषयों पर ग्रंथ लिखे।वे बहुत बड़े […]

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यादों केे झरोखों से:: … ” तूफान में फँसी जिंदगी–भय और आशंका के वो बाईस घंटे”

देश के दिल में बैठे हम मध्यप्रदेश के लोग कुदरत के बहुत से कहर से बचे हुए हैं, जिनमें एक समुद्री तूफान भी है। हाँ, कभी-कभार तेज हवाएँ चलती जरूर हैं, पर वह तूफानी हवाओं केे पासंग में भी नहीं बैठतीं। इसलिए हमें तूफान की विकटता का कभी अनुभव नहीं होता। किन्तु, कभी-कभी अनचाहे “आ […]

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विघ्नहरण की व्यथा

गणेश जी अपने सामने लड्डूओं के थालों को देख-देख कर कंटाल गए थे। जहाँ देखो वहाँ उनके सामने लड्डुओं का थाल लाकर रख दिया जाता है। माना कि मुझे कि लड्डु विशेष प्रिय हैं। फिर भी भला कोई लगातार एक तरह की ही डिश खा सकता है क्या? मेरी इच्छा भी तो होती है कि […]

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“वीरांगना दुर्गादेवी–जिन्होंने मुगलों के छक्के छुड़ाए”

आज का दिन उस राष्ट्रनायिका को स्मरण करने का है,जिन्होंने अपनी स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा के लिए युद्ध के मैदान में लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी,पर प्रबल शत्रु के सामने भी अपने हथियार नहीं डाले। जिनके शौर्य,साहस और पराक्रम को देखकर शत्रु सेना के होश उड़ गए थे।उन्हें तो कल्पना ही […]

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“संख्या में कम, योगदान में महान: पारसी समाज”

कहते हैं तादाद कम होने से कुछ नहीं घटता,अगर आप में ज़ज्बा और हौसला है तो आप बहुत कुछ कर गुजर सकते हैं।यह बात पारसी समुदाय पर पूरी तरह लागू होती है। पारसी समुदाय के लोग जिस भी क्षेत्र में उतरे,वहाँ अपनी मेहनत,प्रतिभा और योग्यता के बल पर अलग पहचान बनाई। चाहे वह क्षेत्र उद्योग […]

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जेलों में बीता हुआ बचपन

जेल में कोई खुशी-खुशी जाना और रहना नहीं चाहता है, क्योंकि वह कोई पाँच सितारा होटल तो होती नहीं। इसलिए जेल के नाम से ही लोगों को घबराहट होने लगती है। अधिकतर लोगों की धारणा होती है कि जेल यानि कि यातनागृह। जबकि ऐसा होता नहीं है। पर जेलें कोई सुविधा घर भी नहीं होतीं, […]

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