आद्यशक्ति जगदम्बिका की कृपा के बिना दुनिया के कोई भी कार्य संभव ही नहीं है।समस्त शक्ति की स्त्रोत वे ही हैं।रावण से युद्ध के पूर्व श्रीराम ने भी नवरात्रि का व्रत कर माता जगदम्बिका की आराधना की थी और उनका आशीर्वाद पाया था।शिव के साथ शक्ति की उपासना करना स्वाभाविक बात प्रतीत है।क्योंकि दोनों ही […]
5.2 कैसी थी श्रीराम की कद-काठी
रामचरित मानस की कथा तो हम जानते ही हैं कि जब हनुमान् जी माता सीता से भेंट करने लंका गए तो उन्होंने अपना आकार सूक्ष्म बना लिया और वे अशोक के वृक्ष पर चढ़ कर स्वयं को पत्तों में छिपा कर बैठ गए। वहाँ कुछ देर बाद अंत:पुर की स्त्रियों के साथ रावण आया।उसने सीता […]
5.3 शत्रु की भी सराहना करने वाले महान पराक्रमी हनुमान्
आमतौर पर हम तो अपने मित्रों के गुणों की सराहना करने में कंजूसी वापरते हैं। जबकि,जो गुणग्राहक होते हैं, वे इस मामले में बहुत उदार होते हैं और मित्रों या परिचितों के छोटे-छोटे गुणों की सराहना करने से भी नहीं चूकते। पर जो महान होते हैं, उनकी गुणग्राहकता और भी अधिक होती है और वे […]
