इन दिनों नवरात्रि का समय चल रहा है। आज हम एक ऐसी देवी की चर्चा करते हैं,जिनके बारे में आमतौर पर हमें बहुत कम माहिती है। शास्त्रों के अनुसार जब भगवान नारायण ने भगवान नरसिंह का तमस अवतार लिया, तब वे अपने हाथों हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद भी शांत नहीं हुए। देवताओं नरसिंह […]
6.9 ‘जब श्रीराम ने रावण को जीवन-दान दिया’
संभवत: अपवाद स्वरूप ही कोई ऐसा हो,जो अपने शत्रु के बल,तेज, प्रताप और शौर्य की प्रशंसा मुक्त कंठ से कर सकता हो।ढूंढ़ने पर भी ऐसा व्यक्ति मिलना मुश्किल है।केवल श्रीराम में ही ऐसे अनोखे गुण मिल सकते हैं। पराकाष्ठा तो यह है कि एक वही हैं,जो सुधरने का मौका देने के लिए शत्रु को एक […]
6.10 लक्ष्मण का संयम- जो मेघनाथ की मृत्यु का कारण बना.
श्रीराम हम पर भले ही अकारण कृपा कर दें,पर हम बिना मतलब के उन्हें याद नहीं करते।उनके समय में भी ऐसे पात्र कम ही थे,जो नि:स्वार्थ सेवा की भावना से उनसे जुड़े रहे हों।ऐसे पात्रों में एक तो मारुतिनंदन हनुमान का नाम याद आता है,दूसरा सुमित्रानंदन लक्ष्मण का।राम-कथाओं में हनुमानजी काफी बाद में राम के […]
6.11 रावण-वध से संबंधित में कुछ अनोखी कथाएँ.
आज विजयादशमी के दिन को असत्य पर सत्य,बुराई पर अच्छाई,अँधेरे पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाते हैं और मानते हैं कि आज के ही दिन श्रीराम ने दुष्ट रावण का वध किया था।किन्तु,अनेक लोगों का मत कुछ अलग है।।एक ज्योतिषाचार्य श्री योगेश मिश्र ने अपनी ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर बताया कि श्रीराम […]
6.12 कैसे हुआ महाबलशाली रावण का अन्त
महाप्रतापी रावण को मार गिराना श्रीराम के लिए भी आसान नहीं था। रावण महाबली के साथ ही महामायावी भी था। उसने कई विद्याएँ सिद्ध की थीं। जैन रामकथा ‘पमउचरियं’ के अनुसार रावण बहुरूपिणी विद्या की सिद्धि के लिए शांतिनाथ मंदिर में साधना करने जाता है। वह ध्यान में लीन हो जाता है। तब यह ज्ञात […]
7.1 लंका-विजय के बाद श्रीराम की वापसी: विविध रामकथाओं में
श्रीराम लंका से कब और कैसे लौटे थे,इस बारे में अलग-अलग कथाएँ हैं।वाल्मीकि रामायण की प्रचलित कथा के अनुसार राम विभीषण का आतिथ्य-सत्कार अस्वीकार कर उनसे अयोध्या की यात्रा का प्रबंध करने का अनुरोध करते हैं।विभीषण पुष्पक प्रस्तुत करता है।राम की अनुमति पाने पर सुग्रीव अपने वानरों और विभीषण अपने आमात्यों के साथ पुष्पक पर […]
7.2 श्रीराम के विविध काम.
रामकथा के कई आयाम हैं।पर रामचरित मानस की रामकथा के अनुसार श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे,उनका राज्याभिषेक हुआ,राम राज्य आ जाने से हर ओर आनंद-मंगल का वातावरण छा गया।सब सुखी और निरोगी हो गए और अपने कर्तव्य पालन में लग गए।तुलसीदास जी ने इसका वर्णन कुछ इस तरह किया है:- “दैहिक दैविक भौतिक […]
7.3 “श्रीराम को कहाँ आराम”
रामकथा के कई आयाम हैं।पर,रामचरित मानस की रामकथा के अनुसार श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे,उनका राज्याभिषेक हुआ,राम राज्य आ जाने से हर ओर आनंद-मंगल का वातावरण छा गया।सब सुखी और निरोगी हो गए और अपने कर्तव्य पालन में लग गए।तुलसीदास जी ने इसका वर्णन कुछ इस तरह किया है:- “दैहिक दैविक भौतिक तापा। […]
7.4 लवणासुर के संहारक- शत्रुघ्न.
श्रीहरि विष्णु के अंशावतार और श्रीराम के अनुज होने के उपरान्त भी रामकथाओं में शत्रुघ्न का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। यद्यपि शत्रुघ्न का चरित्र अत्यंत विलक्षण था। वे मौन सेवावृति थे। वे मितभाषी, सत्यवादी और विषय-विरागी थे। वे सदैव भरत के अनुगामी बने रहे। बचपन से ही भरत का अनुगमन और सेवा ही उनका […]
7.5 सीता जी का त्याग
अनेक पौराणिक नायिकाओं का जीवन बहुत कष्ट में बीता।जैसे-दमयंती,सावित्री, अहल्या,सीता आदि।निष्कलंक और निष्पाप सीता जी ने तो कभी सोचा भी नहीं था कि एक बार अग्नि में प्रवेश करने की भीषण परीक्षा से गुजर जाने और अग्निदेव एवं अन्य देवताओं के द्वारा प्रत्यक्ष आकर उनकी पवित्रता का साक्ष्य देने के बाद भी अयोध्या की प्रजा […]
7.6 विष्णुभक्त नारद जी का मोह
पुराणों में शायद ही कोई ऐसी कथा होगी,जिसमें नारद जी का उल्लेख न हो।ब्रह्माजी के मानस पुत्र देवर्षि नारद अद्भुत व्यक्ति थे।वे त्रिकालदर्शी, वेदों के ज्ञाता,समस्त शास्त्रों के मर्मज्ञ, परम तेजस्वी और सभी विद्याओं में निपुण थे।देव-दानव सभी उनका सम्मान करते थे और सभी लोकों में उनकी गति थी।रामकथा के संदर्भ में तो ऐसा लगता […]
7.7 “श्रीराम ने इस धरा-धाम पर कितना समय बिताया”
श्रीराम ने इस धरा-धाम पर कितना समय बिताया था,यह तो पक्के तौर पर कोई नहीं बता सकता।क्योंकि इस बारे में कई मत हैं।किसी का मानना है कि उन्होंने सौ वर्ष बिताए थे तो किसी का दस हजार वर्ष।पर यह सब मानते हैं कि उन्हें वन में चौदह वर्ष बिताना पड़ा था।वास्तव में राम का वनगमन […]
8.1 “राम-जन्मोत्सव तो सीता-जन्मोत्सव क्यों नहीं”
(आज 9 मई, को सीता जन्मोत्सव पर विशेष)सम्पूर्ण भारत में रामनवमी को श्रीराम का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा-भक्ति और धूमधाम से मनाया जाता है। किन्तु, उनकी प्राण-वल्लभा माता सीता का जन्मोत्सव मनाए जाने का समाचार कदाचित् ही मिलता हो। केवल बिहार प्रांत के मिथिलाचंल में उनका जन्म-दिवस बहुत अपनेपन और आत्मीयता से मनाया जाता है क्योंकि […]
8.2 माता सीता का महाकाली स्वरूप”
यदि यह कहा जाए कि माता सीता ही कोलकाता की महाकाली हैं, यह बात कई आस्थावानों को अटपटी लगेगी। क्योंकि, प्रचलित कथाओं के अनुसार भगवती पार्वती ही महाकाली के रूप में कोलकाता में विराजमान हैैं। उन्होंने दैत्यराज शुंभ और निशुंभ के साथ युद्ध के समय अपने नौ रूप प्रकट किए थे, जिसमें एक रूप काली […]
